मंदिर में प्रवेश करते वक्त आधे से ज्यादा लोग करते हैं ऐसी गलती, पुण्य की बजाय पाप के बनते भागीदार

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वैसे तो सभी धर्मों के अनुसार अपने-अपने तरीके से ईश्वर की आराधना की जाती है. मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च  में प्रवेश करने के अपने अलग-अलग असूल बनाये गये हैं. यहां सिर्फ ईश्वर से प्रार्थना करने से ही काम खत्म नहीं होता है बल्कि व्यक्ति को कुछ कामों को सही तरीके से करना ही उसके लिए पुण्य प्राप्ति होती है. अगर कोई व्यक्ति मंदिर में जाकर पूजा के वक्त ऐसे गलत काम करता है तो पुण्य के बजाय पापों का भागीदार बन जाता है.

मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च ये सब आस्था और भक्ती के स्थान हैं यहां मनोरजंन करना अच्छा नहीं माना जाता है. मतलब यहां गाना या फिर जोर-जोर से हंसना नहीं चाहिए. इससे सिर्फ आप पर ही पाप नहीं लगता है बल्कि पास बैठे लोगों का ध्यान भी भटकता है.

मंदिर जाते वक्त अनाप-सनाप शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बातचीत ना करके शांति बनाये रखना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति नीचे बैठकर हाथ जोड़कर बैठा है तो उसके सामने से नहीं निकलना चाहिए. हमेश शिवलिंग का आधा परिक्रमा जरूर करना चाहिए.

ज्यादातर मंदिर में परिक्रमा लिये जाते हैं और इसी दौरान लोग गलती कर जाते हैं. ध्यान रहे परिक्रमा हमेशा उल्टे हाथ की तरफ से शुरु करना चाहिए और सीधे हाथ की तरफ खत्म करना चाहिए.

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