इधर मंदिरों में नागपचंमी की पूजा तो उधर होगी पत्थरबाजी, पीएसी की करवाई गई तैनाती

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श्रावण शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी के नाम से जाना जाता है. 150 साल बाद इस बार नागपंचमी का महासंयोग बन रहा है. इस वर्ष यह पर्व 05 अगस्त दिन सोमवार को उत्तराफाल्गुनी तदुपरि हस्त नक्षत्र के दुर्लभ योग में पड़ रहा है. आज के दिन नागो की पूजा करने से कालसर्प-योग की शान्ति हेतु पूजन का विशेष महत्व शास्त्रों में वर्णित है. देशभर के शिवमंदिरों में भक्तों की कतार लगी हुई है और घरों में भी दूध की छिड़काव किया जा रहा है. सावन सोमवार का आज तीसरे व्रत के साथ नागपंचमी का शुभ अवसर प्राप्त हुआ है. वहीं दूसरी तरफ नागपंचमी के दिन लोग पत्थरबाजी करने की तैयारी में जुट गये हैं. जिसके चलते पीएसी की तैनाती करवा दी गई है.

दरअसल भारत के चंदौली जिले के विशुपुर व महुआरिया गांव में नागपंचमी पर पत्थरबाजी करने की अनोखी परंपरा है. इस परंपरा के लिए सुबह में मंदिर में नागो की दूध और लावा से पूजा की जाती है. उसके बाद पूरा परिवार भोजन करता है और शाम के वक्त नागपंचमी के लिए दोनों गांवों के लोग गंगा से निकले कछार के तट पर इकठ्ठा होने लगते हैं और फिर दोनों तरफ से ललकारने की आवाज होने लगती है.

इस बीच दोनों तरफ के लोग एक-दूसरे को गाली-गलौज करते हैं और पत्थर भी एक-दूसरे पर मारते हैं. कुछ देर तक इस परंपरा को निभाने के बाद दोनों गांव के लोग गले मिलकर एक-दूसरे को नागपंचमी की बधाई देते हैं. परंपरा के बीच तनाव ना पैदा हो उसके लिए पीएसी की तैनाती करवाई गई है. प्रशासन का कहना है परंपरा को मिल-जुलकर और प्रेमभाव से निभाया जाये.

घर आने के बाद शिकायत दूर करते हुए ढुनमुनवा, कजरी आदि सावन के गीत महिलाएं व युवतियां गाती हैं और युवा कूड़ी, कबड्डी का खेल आयोजित करते हैं. बताया जाता है कि सदियों से चली आ रही इस परंपरा को अगर नहीं किया जाता है तो गांव में दैवीय आपदा व अनहोनी की घटना होने का भय बना रहता है. ऐसे में दोनों गांव के लोग मिल-जुलकर इस परंपरा को निभाते हैं. आपको बता दें, भारत में कई त्यौहारों पर ऐसी ही अनोखी परंपराएं निभाई जाती हैं.

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