जन्माष्टमी के दिन गर्भवती महिलाएं भूलकर भी ना करें ये काम, पूजा में इन चीजों को जरूर करें शामिल

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कान्हा, कृष्णा, गोविंद, मुरारी, मुरलीधर, मुरली वाले, गोपाल, श्याम, घनश्याम जैसे कई नामों से पुकारे जाने वाले श्रीकृष्णा की जन्माअष्टमी पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन पर लोग कृष्णा का धूम-धाम से जन्मदिवस मानाते हैं. मंदिरों और घरों में कृष्णा का पालना सजाया जाता है और रात में 12 बजे उनके पैदा होने का इंतजार किया जाता है. उसके बाद उनका भोग लगाकर लोग अपना व्रत खोलते हैं. अगर आप भी जन्माअष्टमी की पूजा करने जा रहे हैं तो जानिए क्या करना शुभ होता है.
इस बार 24 अगस्त को जन्माअष्टमी का त्यौहार मनाया जा रहा है. कृष्णा की पूजा के लिए सबसे पहले एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. उसके बाद श्रीकृष्णा की मूर्ति या फिर झूले वाले बाल गोपाल को चौकी पर रखीए. चौकी पर रखने से पहले बाल गोपाल को गंगाजल और दूध से स्नास कराएं. फिर नये वस्त्र पहनाकर झूले में बैठाकर चौकी पर रखें. दीपक और धूपबत्ती जलाएं. 12 बजे के बाद कृष्णा के रोली और चावल से तिलक करें, श्रृंगार करें और पंचामृत और मिठाई का भोग लगाएं.
माखन मिश्री और अन्य भोग सामग्री अर्पण कीजिए और तुलसी का पत्ता विशेष रूप से अर्पण कीजिए. साथ ही पीने के लिए गंगाजल रखें. कृष्णा का भोग लगाने के बाद व्रत वाले लोग इसी भोग से अपना व्रत खोलते हैं. आप व्रत रखें या न रखें, घर में सात्विक आहार का ही प्रयोग करें.
अगर गर्भवती महिलाएं व्रत रख रही हैं तो उन्हें अपनी सेहत का खास ध्यान रखना होगा. या तो गर्भवती महिलाएं व्रत रखें ही ना और अगर व्रत रखना जरूरी है तो भूखी बिल्कुल भी ना रहें. जूस, दूध, फल और हो सके तो सेंधे नमक से बने भोजन का सेवन करें. व्रत रखने से पेट में हाइपोग्लेशिनिया बनता है, जिससे सिर दर्द, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, गुस्सा आता है. ज्यादा देर भूखे रहने से गर्भ में पल रहे बच्चे को भी परेशानी हो सकती है.

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