इधर चंद्रयान-2 के विक्रम से संपर्क बनाने की कोशिश में लगे थे वैज्ञानिक, उधर दिखाई दी ‘आत्मा’

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इन दिनों देशभर में चंद्रयान-2 को लेकर जोरों-शोरों से चर्चा हो रही है. शुक्रवार रात चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर से संपर्क टूटने के बाद विक्रम की लोकेशन का तो पता चला था लेकिन संपर्क अभी तक नहीं पता चल पाया. जिसके बाद लगातार कोशिश में जुटे हैं वहीं दूसरी तरफ आत्मा को लेकर भी वैज्ञानिकों का चमत्कार भी देखा गया.

व्यक्ति के शरीर से जब आत्म निकल जाती है तो उसकी मौत का पता चल जाता है. आत्मा को लेकर अक्सर लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल आते हैं कि आखिर आत्मा जाती कहां है. कई लोगों का मानना है कि आत्मा तो अजर है अमर है उसे कोई नहीं मार सकता है, फिर ये आत्मा कहां जाती है. हिंदू धर्म में आत्मा को लेकर पूर्नजन्म भी बताया जाता है. धर्म के अनुसार आत्मा एक व्यक्ति के शरीर से दूसरे व्यक्ति में जाती है और लगातार जब उसे मोक्ष प्राप्ति नहीं होती है तब तक आत्मा का पूर्नजन्म का चक्र चलता रहता है. वहीं अब तो वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि आत्मा अजर-अमर है. वैज्ञानिकों ने एक शोध में इसके बारे में विस्तार से बताया है.

वैज्ञानिकों ने काफी लंबे शोध के बाद दावा किया है कि आत्मा कभी मरती नहीं है, सिर्फ शरीर मरता है. मरने के बाद आत्मा शरीर छोड़कर ब्रह्मांड में वापस चली जाती है, और इसमेें निहित सूचनाएं कभी नष्ट नहीं होती हैं. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के गणित व भौतिकी के प्रोफेसर सर रोगर पेनरोज और यूनिवर्सिटी ऑफ एरीजोना के भौतिकी वैज्ञानिक डॉ. स्टुअर्ट हमरॉफ ने करीब दो दशक के शोध के बाद इस विषय पर छह शोधपत्र प्रकाशित किए हैं.

 

वैज्ञानिकों को कहना हैै कि मानव का दिमाग भी कंप्यूटर की तरह काम करता है. जिसमें चेतना या आत्मा जो मस्तिष्क के अंदर मौजूद एक क्वांटम कंप्यूटर के जरिए संचालित होती है.  क्वांटम कंप्यूटर से तात्पर्य मस्तिष्क की कोशिकाओं में स्थित सूक्ष्म नलिकाओं से है जो प्रोटीन आधारित अणुओं से निर्मित हैं. बड़ी संख्या में ऊर्जा के ये सूक्ष्म स्रोत अणु मिलकर एक क्वाटंम स्टेट तैयार करते हैं जो वास्तव में चेतना या आत्मा है.

वैज्ञानिकों के अनुसार शरीर में आत्मा चेतन दिमाग की कोशिकाओं में प्रोटीन से बनी नलिकाओं में ऊर्जा के सूक्ष्म स्रोत अणुओं एवं उपअणुओं के रूप में रहती है. क्वाटंम सिद्धांत प्रतिपादित करने वाले वैज्ञानिक मैक्स प्लंक के नाम पर म्यूनिख में प्लंक इंस्टीट्यूट है, वहां के वैज्ञानिक हेंस पीटर टुर ने भी इसकी पुष्टि की है.

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