पितृ पक्ष में गर्भवती महिलाओं को भूलकर भी नहीं करना चाहिए ये काम, कुल को पहुंचता है दुख

1
68

हिंदू धर्म में कई तरह के त्यौहारो के साथ पुराणों से लेकर उपनिषदों तक में गर्भधारण से लेकर मृत्योपरांत तक कई तरह के संस्कारों का उल्लेख किया गया है. इस उल्लेख में पितृ पक्ष का भी जिक्र किया गया है. 13 सितंबर से पितृ पक्ष यानि श्राद्ध शुरु हो चुके हैं. 15 दिनों के इन पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों को यादकर दान-पुन्न करते हैं. पितरों का श्राद्ध कर उनका तर्पण किया जाएगा. घर-घर में ब्राह्मणों और अपने बहन, बेटी या फिर कुछ रिश्तेदारों को खाना खिलाकर दान दिया जाता है. ध्यान रहे 28 सितंबर तक कोई ऐसा काम ना करें जिससे आपके पूर्वज नाराज हो जाएं.

श्राद्ध करने से कुल में कोई दुखी नहीं रहता, इसलिए इन दिनों पूर्वजों को खुश करने के लिए तपर्ण किया जाता है. पितरों की पूजा करके मनुष्य आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, श्री, पशु, सुख और धन-धान्य प्राप्त करता है। देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्व है. आपको बता दें, इस दिनों पितरों के साथ बुरी आत्माएं भी धरती पर आती हैं, और इन बुरी आत्माओं से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को सूनसान जगह या फिर श्मशान घाट जैसी जगह पर नहीं जाना चाहिए.

इसके अलावा पुरुषों को भी बाल कटवाने, नया मकान और कपड़े खरीदना, विवाह आदि कार्य इन दिनों में भूलकर भी नहीं करवाना चाहिए.

पितृ पक्ष में ब्राह्मणों को भोजन कराने के अलावा यमुना में जल तर्पण करने का भी विधान है. इसी आस्था के चलते पहले दिन फतेहाबाद के जनेश्वर घाट पर यमुना में स्नान के बाद कई लोगों ने अपने पितरों का तर्पण किया.

जिन महिलाओं के सास-ससुर नहीं होते हैं वो महिलाएं इन दिनों श्रृंगार की नई चीजें नहीं खरीदती हैं और ना ही पहनती हैं. ना ही लोगों को इन दिनों नोनबेज का सेवन करना चाहिए.

1 COMMENT

LEAVE A REPLY