इन शहरों में रावण का वध नहीं बल्कि पूजा की जाती है, जो कोई रावण दहन करता है उसके घर में हो जाती है मौत

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असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है दशहरा…पूरा देश इस महापर्व को बड़े ही धूमधाम से मनाता है. हर शहर के कई इलाकों में जगह-जगह पर मेले लगाए गये हैं, जिसमे रावण के पुतले बनाये गये हैं. मेले में आयोजित की गई रामलीला के माध्यम से भगवान श्री राम जी की वीर गाथा दिखाई जाती है, उन्होंने कैसे आज के दिन इतने बुद्धिमान रावण का वध किया था. वैसे तो पूरा देश इस दिन लंकापति के रावण के वध होने पर इस त्यौहार को बड़े ही धूमधाम से मनाता है, वहीं किसान आज के दिन नई फसलों के घर आने की खुशी में मनाते हैं. आज के दिन कई लोग अपने औजारों और हथियारों की पूजा करते हैं. यहां तक कई शहरों में तो रावण का वध नहीं बल्कि पूजा की जाती है.

मध्य-प्रदेश, मंदसौर

मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण का दहन नहीं होता क्योंकि मंदसौर रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था. मंदसौर के दामाद होने के नाते रावण की यहां पूजा की जाती है. यहां रावण की 35 फुट की एक ऊंची मूर्ति भी है.

 

बिसरख, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के बिसरख में भी रावण का दहन नहीं होता है. रामयाण के अनुसार माना जाता है कि इस गांव में दशहरा नहीं मनाया जाता है क्योंकि त्रेता युग में इस गांव में ऋषि विश्र्शवा का जन्म हुआ था और उन्हीं के घर रावण का जन्म हुआ था.

मंदौर, राजस्थान

राजस्थान के मंदौर में रावण और मंदोदरी का विवाह हुआ था. इस जगह को भी रावण की ससुराल मानी जाती है इसलिए यहां ना रावण दहन होता है और ना ही रामलीला मनाते हैं.

बैजनाथ, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल के बैजनाथ में रावण ने भगवान शिव की तपस्या कर मोक्ष का वरदान प्राप्त किया था. यहां के लोगों का मानना है कि यहां जो कोई भी रावण का वध करता है उसके घर में अचानक किसी ना किसी वजह से मौत हो जाती है.

पारसवाड़ी, गढ़चिरौली, महाराष्ट्र

यहां भी रावण का वध नहीं बल्कि पूजा-अर्चना की जाती है.

कानपुर, उत्तर प्रदेश

यहां के लोगों का मानना है कि रावण असुरों के राजा नहीं बल्कि ज्ञानी, कुशाग्र बुद्धि वाले महापंडित थे, इसलिए उनका वध नहीं बल्कि पूजा करनी चाहिए.

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