Piles में जलन और सूजन की समस्या को काफी हद तक केला खत्म कर देता है. इस तरह से करें इस्तेमाल

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ऐनस के अंदरूनी और बाहरी क्षेत्र और रेक्टम के निचले हिस्से की शिराओं में सूजन के साथ खून आना बवासीर बीमारी की तरफ संकेत करता है. उम्र बढ़ने पर ये बीमारी आम हो जाती है. बवासीर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाली बीमारी है. कई बार इस बीमारी की वजह से लोग इतना परेशान हो जाते हैं कि उन्हें घंटों टॉयलेट में बैठना पड़ता है. आज हम बवासीर बीमारी के लक्षण, कारण और इसका ऐसा चमत्कारी उपाय बताने जा रहे हैं जिसके सेवन से आपको कभी इस खतरनाक बीमारी की शिकायत नहीं होगी.

बवासीर की बीमारी से छुटकारा पाने में पके केले को सबसे मददगार माना जा रहा है. पका केला कार्बोहाइड्रेट्स, नैचरल लैक्सेटिव यानी मुलायम करने वाली दवा के रूप में काम करता है. केला पाचन तंत्र बेहतर रखने के अलावा पाइल्स की समस्या दूर करने में फायदेमंद है. केले में मौजूद नैचरल शुगर, ऐंटिबायॉटिक क्वॉलिटी से भरपूर होती है जो इंफेक्टेड एरिया से बैक्टीरिया का ग्रोथ कम करने में मदद करती है.

रोजाना केला खाने से डाइजेस्टिव सिस्टम सही रहता है और पोषक तत्वों का सही तरीके से अब्जॉर्प्शन होता है जिससे इम्यून सिस्टम भी हेल्दी बना रहता है. पाइल्स की वजह से इंफेक्टेड हिस्से में दर्द और जलन को केला बहुत जल्दी ठीक करता है. ़

बवासीर के कारण-

सुबह-शाम शौच ना जाना और शौच जाने पर ठीक से पेट ना साफ होने पर बवासीर हो सकती है.

शौच के समय जोर लगाना और टॉयलेट में काफी देर तक बैठना

प्रसव के दौरान बवासीर होने का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि एनस क्षेत्र पर ज्यादा दबाव पड़ता है.

ज्यादा दिनों तक हृदय व लीवर से संबंधित बीमारी होने से बवासीर का खतरा हो सकता है.

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