AYODHYA VERDICT: मुस्लिम पक्ष के वकील ने खो दिया था अपना आपा तभी के.पारासरन ने 15 मिनट की मुलाकात से बदल दिया मुद्दा

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9 नवंबर को अयोध्या का बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद आखिरकार अंतिम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया. इस फैसले के बाद हिंदूस्तान में एकता की एक अलग ही चहल दिखाई दी. पूरे देश में खुशी की लहर दिखाई दी. इस मामले से जुड़े कुछ नामी लोगों ने भी सुर्खियां बटोरी, जिनकी लगन और मेहनत वाकई में रंग लाई. इन्हीं में से एक वरिष्ठ वकील के. पारासरन भी हैं जिन्होंने 92 वर्षीय की उम्र में अयोध्या मामले में पूरी लागत लगा दी. के. पारासरन ने इस मामले को लेकर जितनी मेहनत की वो वाकई में काबिले तारीफ है. इतना ही नहीं इस मामले में उन्होंने एक एकता का किस्सा भी लोगों को दिखाया.

खबरों के मुताबिक के.पारासरन ने अयोध्या मामले में जितनी रिसर्च की है उतनी शायद कोई नहीं कर सकता है और उतने में तो एक किताब भी लिखी जा सकती है. बताया तो ये भी जाता है कि अयोध्या मामले से जुड़ी हर घटना के.पारासरन को मुंहजबानी याद है. कब कौन सी घटना हुई थी के. पारासरन उंगलियों पर गिन सकते हैं. जब सुप्रीम कोर्ट के. पारासरन ने बड़े ही शांति से हिंदू पक्ष की तरफ से दलील रखी तो उन्हें सुनकर मुस्लिम पक्ष के वकील अपना आपा खो बैठे थे और कोर्ट में ही उन्होंने हिंदू पक्ष की दलीलों की कॉपी फाड़ दी थी.

दरअसल सुनवाई के दौरान जब राजीव धवन ने हिंदू पक्ष की दलीलों की कथित कॉपी फाड़ दी थी, तब भी पारासरन शांत और सौम्य बने रहे. उससे पहले के.पारासरन और राजीव धवन की वो तस्वीर भी सामने आई थी जब फैसले से पहले यानि 16 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान के.पारासरन ने राजीव से मामले को लेकर बात की थी. इस 15 मिनट की मुलाकात में के.पारासरन ने राजीव धवन से क्या बात की ये तो पता नहीं, लेकिन उसके बाद तो और भी ज्यादा हैरानी हुई.

मुलाकात के बाद के.पारासरन ने राजीव के साथ एक फोटो खिंचवाकर ये बताने की कोशिश की थी कि वकील कोर्टरूम में भले ही एक-दूसरे के खिलाफ लड़ सकते हैं, लेकिन देश को जानना चाहिए कि वो असल में एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं.

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