BCCI के नये अध्यक्ष बने सौरभ गांगुली को अभी एक महीना भी नहीं हुआ कि उन्हें इस वजह से छोड़ना पड़ेगा BCCI अध्यक्ष का पद

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दरअसल गांगुली को इस नये पद से छुट्टी देने का कारण बीसीसीआई का नया संविधान कूलिंग ऑफ पीरियड है. इस नियम के मुताबिक लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीसीसीआई के नए संविधान में यह जोड़ा गया है कि कोई भी अधिकारी या खिलाड़ी जो बीसीसीआई या राज्य के किसी पद से जुड़ा हुआ है वह लगातार दो कार्यकाल तक ही अपने पद पर रह सकता है.

 

जी हां…नियम के मुताबिक जैसे ही कोई खिलाड़ी अपने दो कार्यकाल पूरे करता है तो उसके बाद उसको कूलिंग ऑफ पीरियड के तहत 3 सालों तक बीसीसीआई से जुड़े किसी पद पर नहीं रह सकते. इस समय अवधि में सौरव गांगुली बीसीसीआई से जुड़े हुए किसी भी पद पर काम नहीं कर सकते हैं, क्योंकि 2014-15 में कोलकाता क्रिकेट एसोसिएशन से शुरू हुआ यह कार्यकाल 2020 में खत्म हो जाएगा इसलिए सितंबर 2020 में सौरव गांगुली को बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से हटना ही होगा और इसके बाद उनके ऊपर कूलिंग ऑफ पीरियड लागू हो जाएगा.

ऐसे में सौरभ गांगूली 2020 में तो बीसीसीआई के अध्यक्ष पद को नहीं संभाल पायेंगे और उसके बाद क्या होता है वो इस साल की 1 दिसंबर को हो रही सालाना बैठक में पता चलेगा. 1 दिसंबर को सालाना आम बैठक बोर्ड के मुख्यालय मुंबई में इस बात पर चर्चा होगी. इस बैठक में कई बदलाव भी होते दिखेंगे. आपको बता दें, इस नियम के मुताबिक सिर्फ सौरभ गांगूली ही अपने पद को नहीं छोड़ेंगे बल्कि कई और अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं.
अगर इस बैठक में कूलिंग ऑफ पीरियड के नियम को बदलने की सहमती बनी और सुप्रीम कोर्ट से मान्य करार दे देता है, तो गांगुली एक बार फिर से बोर्ड की कमान संभाल सकते हैं. इस मुद्दे के अलावा बैठक में क्रिकेट से जुड़ी कई बातों पर भी चर्चा हो सकती है.

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