उत्तराखंड- प्रतियोगिता में पहुंचे खिलाड़ियों के साथ किया गया घटिया बर्ताव, लड़कियों को सोने के लिए नहीं मिली जगह

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ये तो आपने भी सुना होगा कि खेलों के मामले में उत्तराखंड कई राज्यों से आगे निकल गया है. उत्तराखंड सरकार राज्य के छात्र-छात्रों के लिए खेलों के नये स्त्रोत खोजती है, ताकि खेलों के माध्यम से उत्तराखंड अपनी अलग ही पहचान बनाए. वैसे तो उत्तराखंड खूबसूरती के मामले में लोगों का ध्यान खींचता ही है और साथ ही उत्तराखंड खेलों के लिए भी जाना जाता है लेकिन आज नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर खिलवाने के दावे कर उस वक्त तब खोखले होते दिखाई दिए जब प्रदेश के खिलाड़ियों को खाली पेट सोना पड़ गया.

हरिद्वार में बुधवार से शुरू हुई प्रांतीय विद्यालयी एथलेटिक्स एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उत्तरकाशी, उधमसिंहनगर, चमोली समेत प्रदेश के सभी जनपदों से खिलाड़ी एक दिन पहले ही हरिद्वार पहुंच गए थे. इन खिलाड़ियों की उम्र 8 साल से लेकर 19 साल तक थी. दूसरे दिन प्रतियोगिता के लिए एक दिन पहले से चले खिलाड़ियों को काफी रात हो गई थी. पहुंचने के बाद पता चला कि खिलाड़ियों के लिए ना ही लाइट और पंखे की सुविधा की गई और ना ही उनके खाने-पीने की सुविधा की गई थी.

पूरे दिन सफर में गुजारने के बाद रात को भी बड़े खिलाड़ियों के साथ ही मासूम खिलाड़ियों को खाली पेट सोना पड़ा. गर्म कपड़ों की व्यवस्था न होने के चलते एक लिहाफ में तीन से चार खिलाड़ियों को सोना पड़ा. अब उन्हें उम्मीद थी कि रात में भोजन नहीं मिला, लेकिन सुबह तो मिल ही जाएगा, लेकिन सुबह भी खिलाड़ियों को मात्र चाय और दो ब्रेड दिए गया.

लड़कियों के लिए खेलों में ज्यादा से ज्यादा भाग लेने के लिए जागरुक किया जाता है लेकन ऐसे हालात देखने के बाद हर कोई अपनी बेटियों को खेलों से दूर रखने लगेगा. इस प्रतियोगिता में लड़कों से ज्यादा लड़कियों की संख्या थी. उन्हें ना ही सोने का सही जगह मिली और ना ही सिक्योरिटी गार्ड की सुरक्षा मिली. स्कूल के सिक्योरिटी गार्ड ही रहे हुए थे. लड़कियों का कहना है कि खेल के मैदान में भी बाहर के लड़के घूम रहे थे जिनसे उन्हें अनहोनी का डर भी सता रहा था.

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