दहेज ना देने पर लड़के ने शादी से कर दिया था इंकार, फिर पिता ने उठाया ऐसा कदम कि बिना दहेज के हुई शादी

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भारत में बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का नारा उतनी ही देर तक काम करता है जब तक बेटी छोटी होती है, क्योंकि जब बेटी बढ़ी हो जाती है तो दहेज प्रथा ये नारा खत्म कर देता है, कभी सोचा है कि बेटी पैदा होने पर क्यों परिवार का मुंह लटक जाता है क्योंकि वो उसी वक्त से ही दहेज प्रथा की सोच में पड़ जाते हैं और जब वो दहेज की मांग पूरी नहीं कर पाते हैं तो उन्हें जान भी गंवानी पड़ जाती है. ऐसा ही कुछ यूपी के मैनपुरी में एक पिता के साथ हुआ. शादी की तैयारियां हो चुकी थीं और शादी वाले दिन बेटी दुल्हन के जोड़े में तैयार होकर दूल्हे का इंतजार करने लगती है तभी एक फोन आता है और उसके बाद जो दर्दनाक हादसा होता है उसके बारे में जानकर आपका भी खून खौल जायेगा.

पूरी जिंदगी पसीना बहाकर बेटी के लिए दहेज इक्ट्टा किया और एक पल में सब कुछ तबाह हो गया. महेमानों से घर भरा था और सब की निगाहें दरवाजे पर थीं, लोग बारात का इंतजार ही कर रहे थे तभी दूल्हे पक्ष से फोन आता है कि पांच लाख नकद दिये जायेंगे तभी बारात आयेगी नहीं तो नहीं आयेगी. एक पल के लिए पिता को लगा कि शायद मेरे कानों ने कुछ गलत सुना. पिता टेंशन में आ गया और उसने इतनी मांग पूरी ना करके फांसी लगाना ठीक समझा.
पिता ने पास के ही स्कूल में जाकर बरामदे में फंखे से फांसी लगा ली, पिता को चारो तरफ ढूंढा तो स्कूल में उन्हें फांसी से लटका पाया गया. पिता का शव देख बेटी का खून खौल गया और गांव वालों ने इकट्टा होकर ससुराल वालों को आत्महत्या के लिए उत्साहित कराने का आरोप लगाने की धमकी दी और तब तक व्यक्ति के शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जब तक बेटी की शादी नहीं करवा दी. घबराए हुए लड़के पक्ष ने आनन-फानन में कोर्ट मैरिज की जिसके बाद पिता का अंतिम संस्कार किया गया.

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