यूपी में सपा-बसपा गठबंधन से उत्तराखंड में कांग्रेस की उड़ गई नींद.. क्यों ज़रूरी है उत्तराखंड में कांग्रेस को बसपा का साथ ?

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पडोसी राज्य उत्तर प्रदेश में सपा – बसपा के गठबंधन के बाद उत्तराखंड में कांग्रेस की सांसे अटक गयी हैं… उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में बसपा का वोट बैंक है… खासकर हरिद्वार संसदीय सीट में… कांग्रेस को उम्मीद थी कि शायद बसपा का साथ उसे हरिद्वार में मिल जायेगा। यहां से चुनाव लड़ने की सोच रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अब कहते हैं चिंता की कोई बात नहीं,, दलित इस बार कांग्रेस के साथ आएगा।
असल में उत्तर प्रदेश में सपा – बसपा के साथ आने से उत्तराखंड में भी सुगबुगाहट है…यूपी से इतर उत्तराखंड में समाजवादी पार्टी केवल कुछ पॉकेट्स तक ही सीमित है जबकि बसपा दो ज़िलों हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में मजबूत है… 2017 विधानसभा चुनाव में जरूर बसपा का वोट प्रतिशत लुढ़क गया था, लेकिनइससे पहले के चुनावों में बसपा को औसतन 15 फीसदी वोट मिलता रहा है… यूपी में गठबंधन के बाद दोनों पार्टियों के नेता कह रहे हैं कि वो उत्तराखंड में भी गठबंधन चाहते हैं, हालांकि अंतिम निर्णय आला नेताओं को करना है।
दरअसल उत्तराखंड में कांग्रेस बसपा का साथ मिलने की उम्मीद कर रही थी… हरिद्वार के पूर्व सांसद और दोबारा यहाँ से चुनाव लड़ना चाह रहे हरीश रावत बसपा पर अभी भी सॉफ्ट हैं….इसकी एक बड़ी वजह यह है हरिद्वार संसदीय सीट पर करीब 3 लाख मुस्लिम और सवा दो लाख दलित वोट्स है… अब हरीश रावत कहते हैं कि मामला उत्तराखंड का अलग है… उत्तराखंड में दलित कांग्रेस के साथ ही आएंगे.
अब हालांकि कांग्रेस के सूत्र कहते है पार्टी ने उम्मीद नहीं छोड़ी है… यूपी में जो भी हो पर उत्तराखंड में बसपा का साथ कम से कम हरिद्वार और नैनीताल लोकसभा सीट पर कांग्रेस को मिलेगा तभी बात बनेगी।।. लिहाजा बहुत संभावना ये भी है कि उत्तराखंड में कांग्रेस को बसपा का साथ मिल जाए,, नहीं तो कांग्रेस को मुश्किल हो सकती है।..

नीतू कमल

ये लेखक के अपने विचार हैं।

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