धोनी की टीम मैच जीती.. मगर खिताब नहीं जीत पाएगी.. ये गलतियां सुधारो माही

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वानखेड़े स्टेडियम में आईपीएल के पहले मैच में चेन्नई की टीम प्रतिबंध के बाद वापसी कर रही थी. मुकाबला घरेलू टीम और मौजूदा चैंपियन मुंबई इंडियंस से था. बावजूद इसके चेन्नई के प्रशसंकों की कमी नहीं थी. ऐसे उत्साह बढ़ाने वाले माहौल में जब चेन्नई ने अप्रत्याशित तरीके से मुंबई को आखिरी ओवर में हराया तो फैंस में करंट दौड़ गया..

चेन्नई ने मुंबई की तरफ से दिए गए 166 रन के लक्ष्य के जवाब में 19.5 ओवर में 9 विकेट पर 169 रन बनाकर जीत हासिल कर ली,, लेकिन ये जीत चेन्नई के लिए अप्रत्याशित ही थी,, चेन्नई की टीम मैच में या तो मुंबई की पारी में पहले 6 ओवर में थी,, या फिर आखिर के 3 ओवर में,,, बाकी पूरे मैच में मुंबई इंडियंस का ही दबदबा दिखा,,, इसीलिए इस जीत के बाद भी कप्तान धोनी के लिए आने वाले दिन आसान नहीं रहेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि मुंबई के खिलाफ मैच में चेन्नई की टीम में वो बिजली नहीं दिखाई दी जिसके लिए वो जानी जाती है,,, इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि धोनी इस सीजन में ज्यादातर ऐसे खिलाड़ियों को लेकर मैदान में उतरे हैं जो तीस की उम्र को पार कप चुके हैं. कई खिलाड़ी तो 35 पार के हैं. इमरान ताहिर तो 40 के होने वाले हैं।

वैसे ये वही धोनी हैं जिन्होंने जब टीम इंडिया की कप्तानी संभाली तो यंगिस्तान का नारा दिया था. धोनी टीम में लगातार नए खिलाड़ियों की वकालत करते थे. वही धोनी मुंबई के खिलाफ जब शनिवार को ग्यारह खिलाड़ियों के साथ मैदान में उतरे तो उनकी टीम में 9 खिलाड़ी ऐसे थे जो तीस की उम्र को पार कर चुके हैं।..
करीब 26 साल के दीपक चाहर और 28 साल के मार्क वुड को छोड़ दें तो अधिकांश खिलाड़ियों का करियर अपनी अपनी नेशनल टीमों के लिए खत्म हो चुका है,,, तीस की उम्र से करीब 6-7 महीने कम चल रहे रवींद्र जडेजा भी फिलहाल लिमिटेड ओवर टीम से बाहर ही हैं,,, मुंबई के खिलाफ मैच में भी धोनी ने जडेजा से सिर्फ एक ओवर गेंदबाजी कराई. बढ़ती उम्र के खिलाड़ियों का उनकी गेंदबाजी और फील्डिंग पर साफ असर दिखाई दिया।..

सुरेश रैना और रवींद्र जडेजा के करियर में आईपीएल का बड़ा रोल है. इन दोनों खिलाड़ियों को आईपीएल ने बड़ी पहचान दिलाई है. बावजूद इसके इन दोनों ही खिलाड़ियों ने निराश किया. रैना तो खैर पॉवरप्ले में कुछ रन जोड़ लेने की कोशिश में आउट हुए. जडेजा जिस वक्त आउट हुए उस वक्त उन्हें क्रीज पर टिकना चाहिए था. इस बात को समझने की जरूरत है कि जीत हासिल करने के लिए मैच को आखिरी ओवर तक पहुंचाना जरूरी है। ब्रावो भी जीत तक इसीलिए पहुंचा पाए क्योंकि उन्होंने आखिरी के ओवरों तक मैच को पहुंचाया. ये सच हैं कि किसी भी तरह से मिली जीत जीत होती है. जीत का एक स्वाद होता है. इसीलिए कहते भी हैं कि अंत भला तो सब भला लेकिन इस जीत में रह गई कमियों को दूर करना धोनी के लिए चुनौती रहेगा, उनके पास इस सीजन में अगर कुछ है तो सिर्फ एक चीज- अनुभव. बिजली की फुर्ती से चलने वाले इस खेल में वो ‘अनुभव’ के बल पर कहां तक जाएंगे ये देखना दिलचस्प होगा,, वैसे अगर धोनी अनुभव के साथ थोड़ा सा युवा जोश भी जोड़ दें,, तो चेन्नई की ताकत दोगुनी हो जाएगी।

 

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