23 बच्चों की मौत: किसी को गोदी में-किसी को कंधे पर ले जाकर बचाया

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नूरपुर (कांगड़ा)/पठानकोट.नूरपुर के वजीर राम सिंह पठानिया हाई पब्लिक स्कूल बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से 27 लोगों की मौत हो गई। इनमें 23 बच्चे (13 लड़के, 10 लड़कियां) दो टीचर, एक ड्राइवर व एक महिला शामिल है जिसने लिफ्ट ली थी। बस में कुल 37 लोग थे। सोमवार को लगभग 4.30 बजे स्कूल से छुट्टी होने के बाद निजी स्कूल की बस बच्चों को घर छोड़ने जा रही थी। चेली गांव के समीप संकरे रास्ते में एक मोटरसाइकिल वाले को साइड देते हुए बस अनियंत्रित हो गई और 200 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में बस ड्राइवर सेवानिवृत सैनिक मदन सिंह सहित 22 लोगों की मौके पर मौत हो गई जबकि बाकी को गंभीर हालत में नूरपुर अस्पताल में भर्ती करवाया गया। ऐसे निकाला बच्चों को…

गंभीर रूप से घायल 6 छात्रों का इलाज अमनदीप हॉस्पिटल पठानकोट में चल रहा है जबकि चार घायल छात्रों का उपचार नूरपुर हॉस्पिटल में चल रहा है जिनमें मनीष, कनिका ईशांत व रणवीर शामिल हैं। कुल 10 बच्चों को पठानकोट भेजा गया था जिनसे से इलाज के दौरान 3 की मौत हो गई थी। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि बस गिरने के दौरान एक बच्चा उसमें से उछलकर बाहर गिर गया। वह जैसे तैसे ऊपर पहुंचा और जिसने शोर मचाकर लोगों को इकट्‌ठा किया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने खाई में उतरकर बच्चों को निकाला।

प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दुर्घटना पर गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं। इसके साथ ही दुर्घटना में मारे गए छात्रों,अध्यापकों व ड्राइवर के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपए की फौरी राहत देने की घोषणा की है।

एडमिशन लेने के बाद कई बच्चे पहले ही दिन गए थे स्कूल और काफी खुश थे

जानकारी के अनुसार ज्यादातर बच्चे सोमवार को पहली बार ही दाखिला लेने के उपरांत स्कूल गए थे। बच्चे स्कूल से लौटते हुए काफी खुश थे लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी और परिवारों की खुशी को छीन लिया। हादसे की सूचना मिलते ही बच्चों के घरवाले मौके पर पहुंच गए। गांवों में चीख- पुकार मच गई। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। अस्पताल में भी हर तरफ बच्चों की लाशे रखी हुइ थीं और घर वाले बिलख रहे थे। वहीं, क्वाड़ा गांव के दो भाइयों के चार बच्चे इस हादसे में मारे गए हैं। दोनों भाइयों के पास एक-एक लड़की और एक-एक लड़का था। हादसे की खबर सुनकर सभी बच्चों के माता-पिता व गांववाले मौके पर पहुंच गए। क्वाडा गांव की बच्ची पलक के पिता राजेश व मां का रो-रोकर बुरा हाल था। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भी गांव वालों और परिवार वालों की भीड़ जमा थी।

2015 मॉडल की थी स्कूल बस

निजी स्कूल प्रशासन के प्रबंधक बिट्‌टू ने बताया कि बस का मॉडल 2015 का था जिसकी पासिंग30अप्रैल तक वैध थी। बस की इंश्योरेंस मार्च2018 में ही करवाई गई थी। बस ड्राइवर मदन सिंह (60) निवासी सुल्याली पिछले 13 वर्षों से स्कूल बस चला रहा था। इससे पूर्व वह सेना से सेवानिवृत होकर घर आया था। घर आते ही उसने स्कूल बस चलाने की नौकरी कर ली थी। 35स्टूडेंट्स जोकि चक्की दरिया के कुठेड़ा, संगोता,कयोड़ा व ठेहड़ा गांव के रहने वाले थे। इनमें से अधिकतर छात्र सोमवार को पहली बार स्कूल गए थे।

बाइक को साइड दी और वहीं से लुढ़की बस

अस्पताल में भर्ती 5वीं के छात्र रणवीर ने बताया कि बस जब चेली के पास पहुंची तो एक बाइक सवार आ रहा था। बस ने उसे साइड दी और उसके बाद बस ढांक से नीचे की तरफ लुढ़क गई। बस का दरवाजा खुला होने की वजह से वह बाहर गिर गया। इसके बाद वह लकड़ी का सहारा लेकर ऊपर पहुंचा।

प्रदेश में अब तक हुए बड़े हादसे

– सितंबर 2011 में कांगड़ा जिले में आशापुरी जाती बस हादसे में 34 मौतें। इस हादसे के बाद हर कोई सहम गया था।
– 11 अगस्त 2012 को चंबा में बस गिरने से 47 की माैत।
– अप्रैल 2017 में शिमला जिले के गुम्मा में बस गिरने से 46 मौतें।
– मई 2017 में मंडी में बस ब्यास में गिरने से 16 मौतें।
– जुलाई 2017 में रामपुर में गिरी बस में 20 की मौत।

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