दिन में 2 बार दर्शन देकर समुद्र में गायब हो जाता है ये चमत्कारी मंदिर, कहानी जानकर दंग रह जायेंगे

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भारत के प्राचीन और रहस्मीय मंदिरों में से एक गुजरात का स्तंभेश्वर महादेव मंदिर भी है. जिसका चमत्कारी रहस्य ना केवल देश में बल्कि विदेशों तक में प्रसिद्ध है. वैसे तो भारत में एक नहीं बल्कि कई रहस्यमीय मंदिर हैं जिनका रहस्य देखकर वैज्ञानिक भी हैरान रह गये. ऐसा कुछ स्तंभेश्वर महादेव मंदिर है जो दिन में 2 बार दिखाई देता है और सूरज ढलते ही समुद्र में विलीन हो जाता है. जी हां…मंदिर का ये चमत्कार सुनकर तो आप भी दंग रह गये होंगे लेकिन ये मंदिर की सच्चाई बताई जा रही है. इस मंदिर के इस चमत्कारी रहस्य के पीछे एक बड़ी वजह छिपी है जो हर किसी को शायद नहीं पता होगी.
बताया जाता है कि ताड़कासुर नाम के एक असुर ने भगवान शिव को तपस्या कर प्रसन्न कर दिया था. जिसके बाद भगवान शिव ने उसे अमर रहने का वरदान दिया. मतलब कि असुर का सिर्फ शिव पुत्र ही वध कर सकता है और किसी के हाथों असुर की मौत नहीं हो सकती. इसके अलावा अगर शिव पुत्र 6 दिन का है तभी वो असुर को मार सकता है. अमर रहने का वरदान पाकर असुर ने तीनों लोक में आतंक मचा दिया. ऋषि मुनी से लेकर देवताओं तक को असुर की हरकतों से परेशानी होने लगी.
जिसके बाद सभी देवाओं ने भगवान शिव के पास पहुंचकर असुर की मौत की प्रार्थना की. शिव जी ने प्रार्थना स्वीकार करते हुए श्वेत पर्वत कुंड से उत्पन्न हुए 6 दिन के कार्तिकेय, जिनकी 4-आंख, 6-मस्तिष्क और 12 हाथ थे, से ताड़कासुर का वध करवाया.
उसके बाद कार्तिकेय को शिव भक्त होेने का ज्ञान प्राप्त हुआ. जब कार्तिकेय को पसंद नहीं आया तब भगवान विष्णु ने उन्हें शिवलिंग स्थापित करवाकर रोज माफी मांगने के लिए कहा. इसलिए मंदिर माफी के रूप में झुकता है और सुबह में 2 बार निकलता है. इस तरह से यह शिवलिंग यहां विराजमान हुआ और तबसे ही इस मंदिर को स्थंभेश्वर के नाम से जाना जाता है.

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