उत्तराखंड से निठारी ऐसे पहुंचा था सुरेंद्र कोली और वहां बच्चों के साथ करने लगा था घिनौना काम

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देश का बहुचर्चित निठारी कांड को 13 साल हो चुके हैं और अब तक मामले के दोषी सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को फांसी की सजा नहीं दी गई है बल्कि दसवें केस में तक उन्हें फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है. अभी तक सिर्फ सुरेंद्र कोहली ही जेल की सलाखों में सजा-ए-मौत काट रहे थे कि अब उनके साथी मोनिंदर सिंह को भी फांसी की सजा सुना दी गई है. 13 साल से अपनी दोनो मासूम के इंसाफ में माता-पिता ने मोनिंदर को भी उतना ही दोषी बताया है जितना सुरेंद्र कोहली है.

याद हो 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 का निठारी कांड ने पूरे देश को झंकझोर कर रख दिया था. ना जाने कब से सुरेंद्र और मोनिंदर मासूम बच्चों के साथ कुर्कम कर उनकी हत्या करते थे और फिर उनके शरीर के अंगों को निकालकर विदेशों में बेचा करते थे. कई सारे बच्चे गायब होते चले गये और उनके माता-पिता बस ढूंढते रहे जाते थे लेकिन बच्चों का कहीं पता नहीं लग पाया.
जब 2006 में पायल नाम की लड़की अपने घर से रिक्शे से उस कोठी के पास रुकी थी जहां सुरेंद्र और मोनिंदर रहा करते थे. लड़की रिक्शेवाले को पैसे देने के लिए कोठी के अंदर गई थीं लेकिन वो दोबारा बाहर नहीं आई. जब काफी देर हो गई तो रिक्शेवाला भी कोठी के अंदर गया जहां मोनिंदर ने उसे बोला कि लड़की तो बहुत देर से जा चुकी है जिसके बाद रिक्शावाला वहां से चला गया. माता-पिता को कोठी के बारे में पता चला तो उन्होंने पुलिस पर दबाव डालकर कोठी की जांच करने की बात कही. तब कई बच्चों के शरीर के अंग मिले थे.
सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के अल्मोड़ा गांव के रहने वाला है. जो दिल्ली में काम करने के लिए आया था. दिल्ली आते ही सुरेंद्र एक ब्रिगेडियर के घर खाना बनाने लगा था. सुरेंद्र खाना बनाने में प्रसिद्ध था जिसकी मुलाकात मोनिंदर से हुई. मोनिंदर ने सुरेद्र को निठारी गांव में कोठी नंबर डी-5 में खाना बनाने की बात करवाई. कुछ दिन बाद उस कोठी के मकानमालिक बाहर चले गये जिसके बाद सुरेंद्र और मोनिंदर दोनों इस कोठी में कॉलगर्ल को बुलाने लगे और धीरे-धीरे सुरेंद्र को एक ऐसी बीमारी हो गई. जिससे वो बच्चों की तरफ आकर्षित होने लगा और फिर जो भी बच्चा पाता था वो और मोनिंदर उसके साथ कुकर्म करते थे.

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