किडनी रोगियों के लिए ये पौधा रामबाण साबित हो रहा है, अब तक कई लोग कर चुके इस्तेमाल

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आज के समय में 60 से 70 साल तक व्यक्ति का जीवित रहना भी मुश्किल हो गया है. छोटी उम्र में ही कई तरह अजीबोगरीब बीमारियां व्यक्ति को घेर लेती हैं. जिसका इलाज करवाना नामुमकिन हो जाता है. डाइबिटीज, कैंसर और किडनी संबंधित बीमारियां आज आम हो गई हैं. ये बीमारियां ना सुनते ही व्यक्ति सदमे में जाने लगता है क्योंकि इन बीमारियां का इलाज बहुत कम ही सफल हो पाता है या तो व्यक्ति जब तक जीवित रहता तब तक दवाईयां खाता है और अगर सही इलाज नहीं हो पाता है तो व्यक्ति की मौत निश्चित है. ऐसी खतरनाक बीमारियों के लिए कभी-कभी आयुर्वेदिक दवाईयां रामबाण साबित हुई हैं. आज हम आपको गुर्दे की बीमारी के लिए एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधी बताने जा रहे हैं जिसके बारे में जानकर आप भी खुश हो जायेंगे.

 

दरअसल हम जिस आयुर्वेदिक दवाई की बात कर रहे हैं वो और कोई नहीं बल्कि पुनर्नवी का पौधा है. इस पौधे से वैज्ञानिकों ने नीरी केएफटी दवा तैयार की. पुनर्नवी के पौधे से तैयार की गई नीरी केएफटी दवा गुर्दा की बीमारी को जड़ से खत्म करने में रामबाण साबित हो रहा है. गुर्दे की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं फिर से स्वस्थ्य हो सकती हैं। साथ ही संक्रमण की आशंका भी इस दवा से कई गुना कम हो जाती है.

 

वैज्ञानिकों के अनुसार पुनर्नवा में गोखुरू, वरुण, पत्थरपूरा, पाषाणभेद, कमल ककड़ी जैसी बूटियों को मिलाकर बनाई गई दवा ‘नीरी केएफटी’ गुर्दे में क्रिएटिनिन, यूरिया व प्रोटीन को नियंत्रित करती है. क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को स्वस्थ्य करने के अलावा यह हीमोग्लोबिन भी बढ़ाती है. अब तक कई लोग इस दवा को आजमा चुके हैं. मेरा तो मानना है कि अगर इस आयुर्वेदिक दवा से अगर किसी को फायदा हो रहा है तो डॉक्टरों को उसे भी अपनाना चाहिए.

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