500 साल पुराने इस पेड़ के पास जाने से कांपते हैं लोग, चौंक जायेंगे जानकर खौफनाक सच

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हिंदू धर्म में देवी-देवाताओं की तरफ तुलसी, बरगद, पीपल जैसे पौधों को भी पूजा जाता है. वैसे तो तुलसी के पौधे के पास हर रोज ही जल चढ़ाकर दीपक जलाया जाता है और पीपल के पेड़ के पास हर शनिवार दीपक जलाया जाता है. बरगद के पेड़ की भी साल में एक बार बड़ी पूजा की जाती है. जिसमें सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए बरगद के पेड़ के पास पूजा करके निर्जला व्रत रखती हैं लेकिन आज हम आपको बरगद का ऐसा पेड़ दिखाने जा रहे हैं. जहां महिलाएं ही नहीं पुरुष भी पास जाने से कांपते हैं. जी हां…इस बरगद के पेड़ के चारों तरफ बॉन्डरिंग कर रखी है ताकि कोई इस पेड़ के पास ना जाये.

पंजाब के फतेहगढ़ के साहिब जिले में 500 साल पुराना ये बरगद का पेड़ मौत का पेड़ के नाम से भी जाना जाता है. अब जानेंगे नहीं कि आखिर क्योंकि इस पेड़ को मौत का पेड़ कहा जाता है. बताया जाता है कि जो भी इस पेड़ की बढ़ती जड़े काटने की कोशिश करता है उसके परिवार में किसी ना किसी व्यक्ति पर काल आ जाता है और मौत भी हो जाती है.

इतना ही नहीं किसानों का मानना है कि अगर उनके खेतों तक इस पेड़ की टहनियां बढ़ती जाती हैं तो वो उतने खेत को छोड़ देते हैं. कई किसान ने तो अपने खेतों की खेती करना भी छोड़ दिया है.

बताया जाता है कि 500 साल पुराने इस बरगद पेड़ की जगह पर एक संत आया था जिसने गांव में एक महिला के बच्चे ना होने की खबर सुनी थी. संत ने महिला के पति को कुछ भस्म अपनी पत्नी को खिलाने की दी थी, जिससे उसके बच्चे हो. लेकिन किसान की पत्नी ने वो भस्म खाने से मना कर दिया और किसान उस भस्म को वापस संत को लौटाने आ गया. संत ने भी वो भस्म लेने से मना कर दिया. जिसके बाद किसान ने उस भस्म को वहीं छोड़ दिया और वापस आ गया. कुछ दिन बाद उस जगह पर बरगद का पेड़ निकल आया और जो भी उस बरगद के पेड़ के पास जाता था उसकी मौत हो जाती थी.

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